
IPS राहुल बंसल के विरोधी पक्ष पर सीबीआई न्यायालय ने 10.000 रुपये का लगाया जुर्माना साथ ही फटकार भी लगाई है
IPS राहुल बंसल पर 1 करोड़ के कथित लेनदेन मामले में आज सीबीआई कोर्ट में सुनवाई के दौरान राहुल बंसल का विरोधी पक्ष जिसने शिकायत की थी दुबारा उपस्थित नहीं हुआ इससे सीबीआई कोर्ट के जज ने 10,000 रूपए का जुर्माना लगाया है।
इससे अंदाज़ लगाया जा रहा है कि राहुल बंसल का पक्ष अब न्यायालय में मज़बूत दिख रहा है।
पिछली सुनवाई में भी राहुल बंसल की शिकायत करने वाला पक्ष वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग में अगली तारीख़ लिया था और आज फिर वही बात हुई।
साथ ही सीबीआई कोर्ट में राहुल बंसल के वकील ने दलील दी कि माननीय न्यायालय के आदेश के बाद भी दूसरे पक्ष ने ऑडियो रिकॉर्डिंग के माध्यम से एकतरफा मीडिया ट्रायल किया है जो बेहद गंभीर मामला है ये मामला भी आज CBI कोर्ट में उठाया गया है।
बैकग्राउंड
IPS राहुल बंसल पर एक करोड़ रुपए लेने के मामले में साज़िश की बू।अंबिकापुर में पदस्थ तेज तर्रार युवा आईपीएस ने पकड़ा है बड़ा रैकेट (1800 करोड़ से अधिक का मामला)कई राज्यों से किया अब तक 23 को गिरफ्तार,जिसके तार जुड़े हैं दुबई से। सरगुजा के कुछ लोगों की भूमिका भी संदिग्ध, कुछ आए पुलिस के रडार पर।पहल से विशेष बात कर कई खुलासे किए आईपीएस राहुल बंसल ने।
आलोक शुक्ल,संपादक पहल।
युवा IPS राहुल बंसल पर एक करोड़ हवाला से लेने के आरोप में साज़िश की बू।डब्बा ट्रेडिंग,क्रिप्टो करेंसी,साइबर फ्राड के विदेश तक में फैले नेटवर्क को तोड़ने पर तुले राहुल बंसल पर एक साथ बड़े सफ़ेदपोशों ने जिस तरह से शिकंजा कसकर उन्हें फंसाने की क़वायद शुरू की है उससे रायपुर में बैठे आला अधिकारियों के कान भी खड़े हो गए हैं।दरअसल राहुल बंसल अंबिकापुर में पदस्थ युवा पुलिस अधिकारी हैं जो ज़िले में सीएसपी हैं।देखा जाए तो इनका कार्यकाल चुनौतियों से भरा हुआ है वो भी ट्रेनी पीरियड में ही।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ का सरगुजा ज़िला कोल माफिया,भू माफिया,और सट्टा खिलाने वालों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है ऐसे में सीधे आईपीएस से चुनकर आए राहुल बंसल को यहाँ का सीएसपी बनाकर भेजा जाता है।
एक साथ कई चुनौतियाँ जिसमें सबसे बड़ी चुनौती सट्टा बाज़ार के उन चालबाजों तक पहुंचना था जिसमें
23 लोग गिरफ्तार हुए हैं जिसमें ये वो मुख्य लोग हैं जो लोगों को फोन करते थे सबसे बड़ी बात ये कि ये खाताधारक नहीं है बल्कि वो मुख्य लोग हैं जो काम करते हैं और फ्राड के रुपए को हवाला के माध्यम से क्रिप्टो करेंसी में बदलकर विदेश भेज देते थे।
दुबई के अलावा इसमें चाइना से तार जुड़े होने के संकेत मिल रहे हैं।
गुजरात, बिहार, रांची, राजस्थान, एम पी, यूपी, हरियाणा से गिरफ्तार हुए 23 जालसाज युवा आईपीएस राहुल बंसल की कड़ी विवेचना पर गिरफ्तार होते हैं और परत दर परत खुलासे शुरू होते हैं।
आईपीएस राहुल बंसल ने पहल से बात करते हुए बताया कि “जिसने केस में मेरे विरूद्ध शिकायत की उससे मैं कभी मिला तक नहीं और तो और बात भी नहीं हुई है। साथ ही एक पुलिस आरक्षक की जिस मुख्य शिकायत कर्ता जो कि आरोपी का साला है उससे बात हुई है ये मेरी जानकारी में नहीं था साथ ही चौंकाने वाला मामला ये है कि पुलिस मात्र 5 महीने के अंदर जो क्रिप्टो करेंसी की चेन से 1880 करोड़ का लेनदेन पाया गया है जिससे कई सफेदपोश भी घबराए हुए हैं। शिकायत कर्ता आकाश का जीजा अभी फरार है।”
सबसे बड़ी बात ये है कि CBI कोर्ट में शिकायत की बात पर CBI ने बताया है कि ये हमारे क्षेत्राधिकार में नहीं है। इसी से कई अनुमान आसानी से लगाए जा सकते हैं कि युवा आईपीएस पर मनोविज्ञानी दवाब बनाकर विवेचना को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
सूत्रों की मानें तो इस मामले में फरार आरोपी के साले ने सीबीआई कोर्ट में शिकायत की है जिसके पीछे भी एक मास्टर माइंड काम कर रहा है। इस मामले में सीबीआई कोर्ट तक पहुंचने की जल्दबाजी कहीं कुछ साजिश कर्ताओं के मंसूबे पर उल्टा पानी न फेर दें। बताया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ के बड़े अधिकारी भी इस मामले में कुछ अहम तथ्य जुटा लिए हैं जिससे IPS राहुल बंसल का पक्ष अब मजबूत होकर सामने आ सकता है। देखना ये है कि इस संगीन मामले में अब सीबीआई कोर्ट में दोनों पक्ष क्या दलील देते हैं वहीं सूत्रों की मानें तो पुलिस विभाग के बड़े अधिकारी सरगुजा एस पी राजेश अग्रवाल पर जमकर भड़के हुए हैं क्योंकि इन्होंने साइबर फ्राड का हवाला देकर कुछ मीडिया रिपोर्टर को सीधे IG से बात करने को कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया था। बताया जा रहा है कि IIT पास आउट कर IPS बने सरगुजा आईजी दीपक कुमार झा ने अंदर ही अंदर एक बड़े पुलिस अधिकारी को पूरे FACT DATA समेत इकट्ठा करने के लिए भी निर्देशित कर दिया था जिसमें एक बात तो साफ़ है कि अंदर ही अंदर सरगुजा में पदस्थ IPS राहुल बंसल को एक षड्यंत्र के जाल में फंसाने के लिए यहां के दो पुलिस वालों को मोहरा बनाया गया इतना ही नहीं इसमें उनकी मदद एक सेवा निवृत पुलिस वाले ने की है जो अक्सर कई मामलों में पहले से ही पुलिस के उच्च अधिकारियों की नज़र में है। देखना ये है कि अब पुलिस के अंदर ही अच्छी पुलिसिंग के दुश्मन बन सट्टेबाजों, अपराधियों को मदद करने वाले किस तरह राज्य की पुलिस के हाथों बेनकाब होते हैं।





अब देखना ये है कि 25 अगस्त को आरोप लगाने वाला पक्ष क्या दलील देता है।
आलोक शुक्ल, सम्पादक पहल।
