ED Exclusive:

छत्तीसगढ के आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा को तलाश रही है ईडी।

केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी छत्तीसगढ़ में बहुचर्चित आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा उर्फ एटी को तलाश रही है। मनी लांड्रिंग से से जुड़े एक मामले में 28 मार्च को जांच एजेंसी ईडी ने एक साथ कई लोकेशन पर सर्च ऑपरेशन को अंजाम दिया था। इसमें आईएएस अनिल टुटेजा के आवास पर भी सर्च ऑपरेशन को अंजाम दिया गया था । अनिल टुटेजा के साथ साथ आईपीएस दीपांशु काबरा,रायपुर महापौर एजाज ढेबर, शराब कारोबारी पप्पू भाटिया,अमोलक सिंह भाटिया समेत 16 जगहों पर सर्च ऑपरेशन को अंजाम दिया गया था।तब से अनिल टुटेजा के बारे में जांच एजेंसी के सूत्र बताते हैं कि वो जांच एजेंसी के सामने आ नहीं रहे हैं माना जा रहा है की वो अपने घर में भी नहीं हैं यानी फरार हैं , अनिल टुटेजा से औपचारिक तौर पर पूछताछ के लिए दो बार समन भेजा गया था , लेकिन दोनों बार वो पूछताछ के लिए सामने नहीं आए, जांच एजेंसी के अधिकारी बताते हैं कि जल्द ही फिर से उन्हें पूछताछ के लिए तीसरा समन भेजने वाली है। जांच एजेंसी के सामने अगर तीसरी बार भी सामने नहीं आएंगे तो आने वाले वक्त में उनकी मुश्किलें और तेजी से बढ़ सकती हैं।शराब माफियाओ समेत महाप्रबंधक अरूण पति त्रिपाठी के यहां भी सर्च ऑपरेशन हुआ था।सूत्रों की मानें तो छत्तीसगढ में बड़े शराब घोटाले को सुनियोजित तरीके से अंजाम देकर दूसरे राज्य में बड़ी रकम भेजने के संकेत केंद्रीय एजेंसी के पास मौजूद हैं।

चौंकाने वाली बात तो ये है कि अरूण पति त्रिपाठी जो कि महाप्रबंधक हैं और छत्तीसगढ की शराब लाॅबी को पूरी तरह नियंत्रित करने वाले हैं इनकी शिकायत पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने सीधे प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से प्रमाण के साथ की थी जिस पर केंद्रीय एजेंसी एक्शन में आई।सूत्रों की मानें तो ईडी के चंगुल में फंसे दिग्गज लोग अभी भी जेल की हवा खा रहे हैं और एड़ी चोटी का जोर लगाने पर भी बाहर नहीं निकल पा रहे हैं।सौम्या चौरसिया,समीर विश्नोई समेत धनकुबेर सुनील अग्रवाल की पूरी जोर आजमाईश के बावजूद ईडी के पुख्ता प्रमाण इन सबके आगे एक ब्रेकर बन कर खड़े हैं।

पुख्ता सूत्रों की मानें तो अभी बड़े नाम जिनमें वरिष्ठ अधिकारी भी हैं इन पर भी ईडी प्रमाणों को हथियार बनाकर इनके बचने के रास्ते को पूरी तरह बंद कर कुछ बड़े खुलासे आने वाले दिनों में करने वाली है।

अनिल टुटेजा बहुचर्चित नान घोटाले में भी ईडी के द्वारा आरोपी बनाए गए हैं।
छत्तीसगढ के शराब घोटाले पर केंद्र की सीधी निगाह। मनी लांड्रिंग का बड़ा मामला।

आईएएस अधिकारी फरार, जांच एजेंसी ईडी कर रही है तलाश ।

जैसे जैसे मामले की परत खुल रही है उससे साफ है कि छत्तीसगढ में सारे नियम कानून को ताक पर रखकर बहुत कुछ किया गया है। इस भर्राशाही में भाजपा के भी कुछ नेता का नाम आने की पूरी पूरी संभावना बनी हुई है क्योंकि जब पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर को मामले की जानकारी रही और उन्होंने शिकायत भी की तब इस मामले पर छत्तीसगढ भाजपा के तथाकथित दिग्गज नेता पूरी तरह मौन क्यों साधे रहे ये तथ्य भी लोगों के गले नहीं उतर रहा है।

ईडी के राडार पर और भी लोग हैं जिनके क्रियाकलापों की प्रमाण सहित जानकारी एकत्र की जा चुकी है।कार्यवाही के लिए दिन और समय केंद्रीय जांच एजेंसी कब तय करती हैं इस पर पूरे छत्तीसगढ की निगाहें टिकी हुई हैं।

By @dmin

You missed

अंबिकापुर में महावीर अस्पताल की एक मशीन सील।कलेक्टर अजीत बसंत के निर्देश पर तीन अस्पतालों का औचक निरीक्षण।लाइफ़लाइन अस्पताल में सभी नियमों का पालन होना पाया गया।

महावीर अस्पताल में लार्ज लैब का लाइसेंस नहीं मिलने पर मशीन सील, पंजीयन के लिए आवेदन करने के निर्देश

अम्बिकापुर, 03 अक्टूबर 2026/ कलेक्टर  अजीत वसंत के निर्देश पर जिले के निजी असअंबिकापुर में महावीर अस्पताल की एक मशीन सील।कलेक्टर अजीत बसंत के निर्देश पर तीन अस्पतालों का औचक निरीक्षण।लाइफ़लाइन अस्पताल में सभी नियमों का पालन होना पाया गया।अंबिकापुर में महावीर अस्पताल की एक मशीन सील।कलेक्टर अजीत बसंत के निर्देश पर तीन अस्पतालों का औचक निरीक्षण।लाइफ़लाइन अस्पताल में सभी नियमों का पालन होना पाया गया।्पतालों में संचालित गतिविधियों लार्ज लैब के पंजीयन, लाइसेंस एवं निर्धारित व्यवस्थाओं की जांच के लिए चार सदस्यीय दल का गठन किया गया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जे.एस. सरूता के मार्गदर्शन में गठित दल द्वारा गायत्री अस्पताल, महावीर अस्पताल एवं लाइफलाइन अस्पताल का निरीक्षण किया गया।

निरीक्षण के दौरान दल ने अस्पतालों में संचालित लार्ज लैब के लाइसेंस एवं पंजीयन संबंधी दस्तावेजों के साथ उपलब्ध व्यवस्थाओं की जांच की। महावीर अस्पताल के निरीक्षण में लार्ज लैब का लाइसेंस नहीं पाया गया। अस्पताल के पास केवल स्माल लैब संचालन का लाइसेंस उपलब्ध था। इस पर लार्ज लैब में उपयोग की जा रही मशीन को तत्काल प्रभाव से सील किया गया। अस्पताल प्रबंधन को लार्ज लैब के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर अनुज्ञापत्र प्राप्त करने के निर्देश दिए गए। निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही लार्ज लैब का संचालन किया जा सकेगा।

गायत्री अस्पताल में लार्ज लैब के निरीक्षण के दौरान दस्तावेजों एवं उपलब्ध व्यवस्थाओं की जांच की गई। वहीं लाइफलाइन अस्पताल के पास लार्ज लैब का लाइसेंस उपलब्ध पाया गया ।

कलेक्टर अजीत वसंत ने जिले के निजी अस्पतालों में संचालित लार्ज लैब का निर्धारित प्रावधानों के अनुसार पंजीयन एवं लाइसेंस सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि लार्ज लैब के संचालन के लिए आवश्यक पंजीयन एवं अनुज्ञापत्र की प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित कराया जाए तथा बिना निर्धारित अनुमति के लैब संचालन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

निरीक्षण दल में नर्सिंग होम एक्ट के नोडल अधिकारी डॉ. पी.के. सिन्हा,  डॉ. दीपक गुप्ता पैथोलॉजिस्ट, शिवेंद्र सिंह सदस्य तथा नर्सिंग होम एक्ट कार्यालय के शाखा प्रभारी  संजय पांडे शामिल रहे।