आखिरकार प्रदेश में लगातार बिगड़ती कानून व्यवस्था और इंटेलीजेंस की कमजोरी के बाद आज राज्य शासन ने भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों की नवीन पदस्थापना के आदेश जारी किए हैं।

इसमें सबसे महत्वपूर्ण राज्य के पूर्व डीजीपी डी एम अवस्थी की पोस्टिंग है।गौरतलब है कि वरिष्ठ आईपीएस डी एम अवस्थी को डीजीपी से हटाकर लूप लाईन में डाल दिया गया था।मगर उनकी क्षमता पर सरकार ने फिर विश्वास करते हुए और सरकार की बिगड़ती छवि के मद्देनज़र उन्हें ईओडब्ल्यू व एंटी करप्शन का महानिदेशक बनाया है।

वहीं लगातार बेहद बदतर कानून व्यवस्था के लिए जाने वाले बिलासपुर के आईजी रतनलाल डांगी को सीधे लूप लाईन में डाल दिया गया है।

वहीं इंटेलीजेंस यानि गुप्त वार्ता जो कि सरकार का सबसे महत्वपूर्ण विभाग होता है इससे आईपीएस आनंद छाबड़ा को स्थानांतरित कर दुर्ग आईजी बनाकर ये विभाग सरगुजा आईजी अजय यादव को दे दिया गया है।

वहीं आरिफ शेख को ईओडब्ल्यू विभाग से स्थानांतरित कर आईजी रायपुर रेंज बनाया गया है मगर आश्चर्य जनक रूप से रायपुर को छोड़कर इस रेंज के अन्य ज़िले का आईजी रखा है वहीं रायपुर ज़िले का आईजी अजय यादव को इंटेलीजेंस के साथ साथ दिया गया है।

इससे साफ है कि छत्तीसगढ सरकार अब कानून व्यवस्था को लेकर किरकिरी करा रहे अधिकारियों को फील्ड से हटाकर ठीक ठाक काम करने वालों को तरजीह देकर अपनी छवि सुधारने का प्रयास कर रही है।

By @dmin

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महावीर अस्पताल में लार्ज लैब का लाइसेंस नहीं मिलने पर मशीन सील, पंजीयन के लिए आवेदन करने के निर्देश

अम्बिकापुर, 03 अक्टूबर 2026/ कलेक्टर  अजीत वसंत के निर्देश पर जिले के निजी असअंबिकापुर में महावीर अस्पताल की एक मशीन सील।कलेक्टर अजीत बसंत के निर्देश पर तीन अस्पतालों का औचक निरीक्षण।लाइफ़लाइन अस्पताल में सभी नियमों का पालन होना पाया गया।अंबिकापुर में महावीर अस्पताल की एक मशीन सील।कलेक्टर अजीत बसंत के निर्देश पर तीन अस्पतालों का औचक निरीक्षण।लाइफ़लाइन अस्पताल में सभी नियमों का पालन होना पाया गया।्पतालों में संचालित गतिविधियों लार्ज लैब के पंजीयन, लाइसेंस एवं निर्धारित व्यवस्थाओं की जांच के लिए चार सदस्यीय दल का गठन किया गया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जे.एस. सरूता के मार्गदर्शन में गठित दल द्वारा गायत्री अस्पताल, महावीर अस्पताल एवं लाइफलाइन अस्पताल का निरीक्षण किया गया।

निरीक्षण के दौरान दल ने अस्पतालों में संचालित लार्ज लैब के लाइसेंस एवं पंजीयन संबंधी दस्तावेजों के साथ उपलब्ध व्यवस्थाओं की जांच की। महावीर अस्पताल के निरीक्षण में लार्ज लैब का लाइसेंस नहीं पाया गया। अस्पताल के पास केवल स्माल लैब संचालन का लाइसेंस उपलब्ध था। इस पर लार्ज लैब में उपयोग की जा रही मशीन को तत्काल प्रभाव से सील किया गया। अस्पताल प्रबंधन को लार्ज लैब के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर अनुज्ञापत्र प्राप्त करने के निर्देश दिए गए। निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही लार्ज लैब का संचालन किया जा सकेगा।

गायत्री अस्पताल में लार्ज लैब के निरीक्षण के दौरान दस्तावेजों एवं उपलब्ध व्यवस्थाओं की जांच की गई। वहीं लाइफलाइन अस्पताल के पास लार्ज लैब का लाइसेंस उपलब्ध पाया गया ।

कलेक्टर अजीत वसंत ने जिले के निजी अस्पतालों में संचालित लार्ज लैब का निर्धारित प्रावधानों के अनुसार पंजीयन एवं लाइसेंस सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि लार्ज लैब के संचालन के लिए आवश्यक पंजीयन एवं अनुज्ञापत्र की प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित कराया जाए तथा बिना निर्धारित अनुमति के लैब संचालन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

निरीक्षण दल में नर्सिंग होम एक्ट के नोडल अधिकारी डॉ. पी.के. सिन्हा,  डॉ. दीपक गुप्ता पैथोलॉजिस्ट, शिवेंद्र सिंह सदस्य तथा नर्सिंग होम एक्ट कार्यालय के शाखा प्रभारी  संजय पांडे शामिल रहे।