आज रायपुर से कुछ तस्वीर आकर्षण का केंद्र बन गई।

मौका था छत्तीसगढ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के जन्म दिन का। वैसे तो कई लोग बधाई देने पहुंचे थे मगर ज्यों ही जय वीरू नाम से प्रसिद्ध हो चुके छत्तीसगढ के जय यानि टी एस सिंहदेव जब भूपेश बघेल यानि वीरू के पास पहुंचे तो सबकी नज़र के साथ साथ कैमरे भी इनकी तरफ़ ही देखने लगे।

दोनों दिग्गज कांग्रेसियों के बीच जिस तरह मुख्यमंत्री के पद को लेकर रस्साकशी चली और अभी भी बीच बीच में चलती रहती है उसके बाद इन तस्वीरों का आना लोगों के साथ साथ राजनेताओं के लिए भी जिज्ञासा का विषय है।अब ढाई ढाई साल वाली बात तो कब की ख़त्म हो गई । बचे हुए सवा साल के लिए ही सही, स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव की मुख्यमंत्री के पद पर क्या ताजपोशी संभव है? ये प्रश्न अभी भी गाहे बगाहे उठ खड़े होता है।

कुछ तो ये भी कहते पाए गए कि जब टी एस सिंहदेव उर्फ बाबा ने जिस गर्मजोशी के साथ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से गले मिले अब इसी तरह भूपेश बघेल को भी रिटर्न गिफ्ट के तौर पर मुख्यमंत्री पद की कुर्सी टी एस सिंहदेव को सौंपकर एक मिसाल कायम करनी चाहिए।

By @dmin

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अंबिकापुर में महावीर अस्पताल की एक मशीन सील।कलेक्टर अजीत बसंत के निर्देश पर तीन अस्पतालों का औचक निरीक्षण।लाइफ़लाइन अस्पताल में सभी नियमों का पालन होना पाया गया।

महावीर अस्पताल में लार्ज लैब का लाइसेंस नहीं मिलने पर मशीन सील, पंजीयन के लिए आवेदन करने के निर्देश

अम्बिकापुर, 03 अक्टूबर 2026/ कलेक्टर  अजीत वसंत के निर्देश पर जिले के निजी असअंबिकापुर में महावीर अस्पताल की एक मशीन सील।कलेक्टर अजीत बसंत के निर्देश पर तीन अस्पतालों का औचक निरीक्षण।लाइफ़लाइन अस्पताल में सभी नियमों का पालन होना पाया गया।अंबिकापुर में महावीर अस्पताल की एक मशीन सील।कलेक्टर अजीत बसंत के निर्देश पर तीन अस्पतालों का औचक निरीक्षण।लाइफ़लाइन अस्पताल में सभी नियमों का पालन होना पाया गया।्पतालों में संचालित गतिविधियों लार्ज लैब के पंजीयन, लाइसेंस एवं निर्धारित व्यवस्थाओं की जांच के लिए चार सदस्यीय दल का गठन किया गया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जे.एस. सरूता के मार्गदर्शन में गठित दल द्वारा गायत्री अस्पताल, महावीर अस्पताल एवं लाइफलाइन अस्पताल का निरीक्षण किया गया।

निरीक्षण के दौरान दल ने अस्पतालों में संचालित लार्ज लैब के लाइसेंस एवं पंजीयन संबंधी दस्तावेजों के साथ उपलब्ध व्यवस्थाओं की जांच की। महावीर अस्पताल के निरीक्षण में लार्ज लैब का लाइसेंस नहीं पाया गया। अस्पताल के पास केवल स्माल लैब संचालन का लाइसेंस उपलब्ध था। इस पर लार्ज लैब में उपयोग की जा रही मशीन को तत्काल प्रभाव से सील किया गया। अस्पताल प्रबंधन को लार्ज लैब के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर अनुज्ञापत्र प्राप्त करने के निर्देश दिए गए। निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही लार्ज लैब का संचालन किया जा सकेगा।

गायत्री अस्पताल में लार्ज लैब के निरीक्षण के दौरान दस्तावेजों एवं उपलब्ध व्यवस्थाओं की जांच की गई। वहीं लाइफलाइन अस्पताल के पास लार्ज लैब का लाइसेंस उपलब्ध पाया गया ।

कलेक्टर अजीत वसंत ने जिले के निजी अस्पतालों में संचालित लार्ज लैब का निर्धारित प्रावधानों के अनुसार पंजीयन एवं लाइसेंस सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि लार्ज लैब के संचालन के लिए आवश्यक पंजीयन एवं अनुज्ञापत्र की प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित कराया जाए तथा बिना निर्धारित अनुमति के लैब संचालन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

निरीक्षण दल में नर्सिंग होम एक्ट के नोडल अधिकारी डॉ. पी.के. सिन्हा,  डॉ. दीपक गुप्ता पैथोलॉजिस्ट, शिवेंद्र सिंह सदस्य तथा नर्सिंग होम एक्ट कार्यालय के शाखा प्रभारी  संजय पांडे शामिल रहे।