ED investigation and
illegal Coal levy extortion scam in the State of Chhattisgarh :

छत्तीसगढ़ में अवैध कोल लेवी मामले में कुल 221 करोड़ रुपये की अटैच की गई अवैध संपत्तियों में से 152 करोड़ 31 लाख की कुर्की पर न्यायालय की लगी मुहर।

केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी (ED) के द्वारा की गई एक बड़ी कार्रवाई पर नई दिल्ली स्थित ईडी की कोर्ट ने मुहर लगाते हुए छत्तीसगढ़ से जुड़े अवैध तौर पर कोल लेवी वसूली भ्रष्टाचार मामले में 152 करोड़ साढ़े 31 लाख करोड़ की कुर्की का आर्डर पास कर दिया है , यानी इसे आसान भाषा में ऐसा कह सकते हैं की की ईडी के द्वारा जो करीब 221 करोड़ रुपये का अटैचमेंट किया हुआ था , उसमें दिल्ली स्थित ईडी की कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी 91 चल -अचल संपत्तियों को जिसका सरकारी मूल्य करीब 152 करोड़ साढ़े 31 लाख करोड़ है अब उस संपत्ति को कुर्क करने का आदेश कोर्ट के द्वारा दे दिया गया है ।

जांच एजेंसी के मुताबिक बाकी की अटैच की हुई चल-अचल संपत्तियों पर भी कार्रवाई भी जल्द ही कोर्ट के मार्फत होने वाली है ।

जांच एजेंसी ने औपचारिक तौर पर इस मामले की जानकारी देते हुए बताई है की कोल लेवी और अवैध तौर पर वसूली मामले में जिस तरह से मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले ( money laundering investigation ) की तफ्तीश की जा रही है , लिहाजा उसी के तहत ये कार्रवाई हुई है और 91 से ज्यादा अचल संपत्तियों को अटैचमेंट किया है , जिसका सरकारी मूल्य करीब 151 करोड़ 31 लाख रुपये है ।हालांकि आज के दौर में इन संपत्तियों के बाजार मूल्य की बात करें तो कई गुना इसकी कीमत होगी ।

आने वाले समय में ईडी और तेजी से छत्तीसगढ़ में कार्यवाही को अंजाम देने के लिए लगातार काम कर रही है।तय है कि अब क़ानूनी लड़ाई दोनों पक्षों से होगी।देखना ये है कि इसमें बाजी कौन मारता है ।

जांच एजेंसी के द्वारा इस मामले में छत्तीसगढ़ के कई विधायकों , ब्यूरोक्रेट सहित अन्य जो आरोपी कारोबारी हैं जिनके खिलाफ जांच एजेंसी ने कार्रवाई की है उनके नाम प्रमुख तौर पर इस प्रकार से हैं —

  1. IAS रानू साहू (Ranu Sahu, IAS)
  2. चर्चित कारोबारी सूर्यकांत तिवारी
  3. विधायक देवेंद्र यादव
  4. विधायक चंद्रदेव प्रसाद राय
  5. सौम्या चौरसिया
  6. विनोद तिवारी
  7. राम गोपाल अग्रवाल
    8आर.पी.सिंह
  8. 9 सुनील अग्रवाल
    10 . समीर विश्नोई

By @dmin

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निरीक्षण के दौरान दल ने अस्पतालों में संचालित लार्ज लैब के लाइसेंस एवं पंजीयन संबंधी दस्तावेजों के साथ उपलब्ध व्यवस्थाओं की जांच की। महावीर अस्पताल के निरीक्षण में लार्ज लैब का लाइसेंस नहीं पाया गया। अस्पताल के पास केवल स्माल लैब संचालन का लाइसेंस उपलब्ध था। इस पर लार्ज लैब में उपयोग की जा रही मशीन को तत्काल प्रभाव से सील किया गया। अस्पताल प्रबंधन को लार्ज लैब के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर अनुज्ञापत्र प्राप्त करने के निर्देश दिए गए। निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही लार्ज लैब का संचालन किया जा सकेगा।

गायत्री अस्पताल में लार्ज लैब के निरीक्षण के दौरान दस्तावेजों एवं उपलब्ध व्यवस्थाओं की जांच की गई। वहीं लाइफलाइन अस्पताल के पास लार्ज लैब का लाइसेंस उपलब्ध पाया गया ।

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निरीक्षण दल में नर्सिंग होम एक्ट के नोडल अधिकारी डॉ. पी.के. सिन्हा,  डॉ. दीपक गुप्ता पैथोलॉजिस्ट, शिवेंद्र सिंह सदस्य तथा नर्सिंग होम एक्ट कार्यालय के शाखा प्रभारी  संजय पांडे शामिल रहे।