बिलासपुर जिले में कोटा थाना क्षेत्र के सलका रोड व बेलगहना स्टेशन के बीच गहिला नाला के रेल लाइन में जिस युवक का शव मिला इनकी पहचान वीरभद्र सिंहदेव उर्फ सचिन के रूप में हुई।बताया जा रहा है, कि वो स्वास्थ्य मंत्री टी.एस.सिंहदेव के रिश्ते में भतीजे लगतेथे। ट्रेन से गिरकर हादसे की आशंका है। कोटा थाना क्षेत्र अंतर्गत सलका स्टेशन व बेलगहना के बीच गहिला नाला के समीप रेल लाइन के पास अज्ञात व्यक्ति की लाश रेलवे कर्मचारियों ने देखी, जिसके बाद कर्मचारियों ने इसकी सूचना स्टेशन मास्टर को दिया। स्टेशन मास्टर की सूचना पर कोटा पुलिस मौके पर पहुंच कर जाँच में जुटी हुई है। मृतक की पहचान वीरभद्र सिंहदेव उर्फ सचिन के रूप में हुई है। वे दुर्ग-अम्बिकापुर ट्रेन से एसी बोगी में रायपुर से अम्बिकापुर जा रहे थे।

सिंहदेव के निकट रिश्तेदार की संदिग्ध मौत की न्यायिक जांच कराएं मुख्यमंत्री- चंद्राकर

रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश भाजपा के मुख्य प्रवक्ता व राज्य के पूर्व मंत्री तथा विधायक अजय चंद्राकर ने स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के निकट रिश्तेदार सचिन की रेल से गिरकर मौत को संदिग्ध बताते हुए आशंका जाहिर की है कि यह राजनीतिक हत्या का मामला हो सकता है। श्री चंद्राकर ने कहा कि मृतक सचिन पूर्व में कांग्रेस विधायक पर हुए हमले के मामले में गिरफ्तार हुए थे। वे पेशी पर जा रहे थे। पेशी पर जाने की जानकारी गोपनीय नहीं हो सकती। इसलिए भाजपा इस संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत की न्यायिक जांच की मांग करती है।

प्रदेश भाजपा के मुख्य प्रवक्ता अजय चंद्राकर ने कहा कि भाजपा निष्पक्ष जांच के बाद सामने आए तथ्यों के प्रकाश में विस्तृत प्रतिक्रिया व्यक्त करेगी। वर्तमान परिस्थितियों में यह सामान्य दुर्घटना प्रतीत नहीं हो रही। मंत्री सिंहदेव के रिश्तेदार सचिन और कांग्रेस विधायक बृहस्पत सिंह के बीच के विवाद में बृहस्पत सिंह ने सिंहदेव से जान का खतरा होना बताया था। जिसका सिंहदेव ने विधानसभा सत्र के दौरान प्रतिरोध करते हुए सदन से बाहर निकल गए थे। ऐसी स्थिति में यह मामला न्यायिक जांच की जरूरत उत्पन्न कर रहा है।

वहीं भाजपा के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता अजय चंद्राकर ने मांग की है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इस मामले की तत्काल न्यायिक जांच के आदेश जारी कर मौजूदा हाइकोर्ट जज से उच्च स्तरीय जांच कराएं।

इनके रिश्तेदार पार्थिव शरीर का पोस्ट मार्टम करवा कर इनके निज निवास धौरपुर आ रहे हैं।

By @dmin

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निरीक्षण के दौरान दल ने अस्पतालों में संचालित लार्ज लैब के लाइसेंस एवं पंजीयन संबंधी दस्तावेजों के साथ उपलब्ध व्यवस्थाओं की जांच की। महावीर अस्पताल के निरीक्षण में लार्ज लैब का लाइसेंस नहीं पाया गया। अस्पताल के पास केवल स्माल लैब संचालन का लाइसेंस उपलब्ध था। इस पर लार्ज लैब में उपयोग की जा रही मशीन को तत्काल प्रभाव से सील किया गया। अस्पताल प्रबंधन को लार्ज लैब के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर अनुज्ञापत्र प्राप्त करने के निर्देश दिए गए। निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही लार्ज लैब का संचालन किया जा सकेगा।

गायत्री अस्पताल में लार्ज लैब के निरीक्षण के दौरान दस्तावेजों एवं उपलब्ध व्यवस्थाओं की जांच की गई। वहीं लाइफलाइन अस्पताल के पास लार्ज लैब का लाइसेंस उपलब्ध पाया गया ।

कलेक्टर अजीत वसंत ने जिले के निजी अस्पतालों में संचालित लार्ज लैब का निर्धारित प्रावधानों के अनुसार पंजीयन एवं लाइसेंस सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि लार्ज लैब के संचालन के लिए आवश्यक पंजीयन एवं अनुज्ञापत्र की प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित कराया जाए तथा बिना निर्धारित अनुमति के लैब संचालन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

निरीक्षण दल में नर्सिंग होम एक्ट के नोडल अधिकारी डॉ. पी.के. सिन्हा,  डॉ. दीपक गुप्ता पैथोलॉजिस्ट, शिवेंद्र सिंह सदस्य तथा नर्सिंग होम एक्ट कार्यालय के शाखा प्रभारी  संजय पांडे शामिल रहे।