छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर शहर से ठगी की एक ऐसी वारदात को अंजाम दिया गया है जिसके बारे में सोचकर लोगों का ज़ुबान पर व्यापार करने की सोच रखने वाले हैरान हो जायेंगे।

मई 2023 में अंबिकापुर की कोतवाली में 6 लोगों के विरूद्ध उड़ीसा के राऊरकेला निवासी सरिया व्यवसायी पंकज अग्रवाल ने रिपोर्ट दर्ज कराई जिसमें पंकज अग्रवाल ने अपने साथ 46 करोड़ रुपये की ठगी करने का आरोप सिलसिलेवार तरीक़े से करने का आरोप लगाया। इसमें अंबिकापुर समेत एक आरोपी यूपी के सोनभद्र की राहुल अग्रवाल का भी है जिसे हाल ही में सरगुजा पुलिस ने गिरफ़्तार किया है लेकिन मास्टर माईंड राहुल गोयल के नाम पर अपराध दर्ज होने के बाद भी ये अभी एक जिम के उद्घाटन में अपेक्स बैंक के सदस्य अजय बंसल के साथ दिखा वहीं पहले भी छत्तीसगढ़ के खाद्य मंत्री अमरजीत भगत के साथ फोटो खिंचवा कर उसका धौंस भी दिखाते रहा।

मंत्री के साथ आरोपी की फोटो।सवाल ये कि मामले के सामने आने के बाद यदि मंत्री स्वयं इसे गिरफ़्तार करने का निर्देश देते और क़ानून का पालन करवाने पर ज़ोर देते मगर अब तक ऐसा नहीं हुआ है।

सरिया व्यवसायी पंकज अग्रवाल ने बताया है कि वो इन लोगों के झांसे में आकर करोड़ों रुपये के कर्ज में डूब गया है। व्यापार में मुनाफ़ा तो मिला नहीं उल्टे इन सब के कहने पर कोयला ऑक्सन में कोयले की नीलामी के लिए पैसा लगाया जिसमें इन सब ने शुरू में तो कुछ मुनाफ़ा कमवाकर पंकज अग्रवाल का भरोसा जीत लिया मगर बाद में बड़ी रकम लगवाई और ये रकम भी वापस नहीं की।

पीड़ित पंकज अग्रवाल मानसिक आर्थिक रूप से परेशान होकर क़ानून की शरण में पहुंचा लेकिन खुलेआम घूम रहे राजनैतिक हस्तियों के साथ संपर्क बताने वाले मुख्य आरोपी का पुलिस की पकड़ से बाहर होना एक बड़ा संदेह भी साबित कर रही है।आश्चर्य ये कि राहुल गोयल केके अग्रवाल थाने से अधिक दूरी पर नहीं हैं मगर गिरफ़्तार नहीं हो सके हैं।

ग़ौरतलब है कि मंत्री के करीबी एक व्यक्ति को ज़मीन घोटाले में सरगुजा पुलिस ने पकड़ा जिसके परिणाम स्वरूप ज़िले में उम्दा कार्य कर रहे पुलिस अधिकारी एडीशनल एस पी पंकज शुक्ला का स्थानांतरण करवा दिया गया इससे भी पुलिस के लोग और आमजन एक नेता पर ही अप्रत्यक्ष आरोप लगा रहे हैं।

प्रश्न ये उठता है कि सरकार में मंत्री व ज़िम्मेदार पद पर आसीन लोगों के साथ फोटो खिंचवा कर अपनी धौंस दिखाने वाले लोगों पर ये नेता मंत्री स्वयं मामला उजागर होने पर स्वयं पुलिस को कड़ी कार्यवाही के लिए निर्देशित क्यों नहीं करते?

By @dmin

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निरीक्षण के दौरान दल ने अस्पतालों में संचालित लार्ज लैब के लाइसेंस एवं पंजीयन संबंधी दस्तावेजों के साथ उपलब्ध व्यवस्थाओं की जांच की। महावीर अस्पताल के निरीक्षण में लार्ज लैब का लाइसेंस नहीं पाया गया। अस्पताल के पास केवल स्माल लैब संचालन का लाइसेंस उपलब्ध था। इस पर लार्ज लैब में उपयोग की जा रही मशीन को तत्काल प्रभाव से सील किया गया। अस्पताल प्रबंधन को लार्ज लैब के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर अनुज्ञापत्र प्राप्त करने के निर्देश दिए गए। निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही लार्ज लैब का संचालन किया जा सकेगा।

गायत्री अस्पताल में लार्ज लैब के निरीक्षण के दौरान दस्तावेजों एवं उपलब्ध व्यवस्थाओं की जांच की गई। वहीं लाइफलाइन अस्पताल के पास लार्ज लैब का लाइसेंस उपलब्ध पाया गया ।

कलेक्टर अजीत वसंत ने जिले के निजी अस्पतालों में संचालित लार्ज लैब का निर्धारित प्रावधानों के अनुसार पंजीयन एवं लाइसेंस सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि लार्ज लैब के संचालन के लिए आवश्यक पंजीयन एवं अनुज्ञापत्र की प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित कराया जाए तथा बिना निर्धारित अनुमति के लैब संचालन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

निरीक्षण दल में नर्सिंग होम एक्ट के नोडल अधिकारी डॉ. पी.के. सिन्हा,  डॉ. दीपक गुप्ता पैथोलॉजिस्ट, शिवेंद्र सिंह सदस्य तथा नर्सिंग होम एक्ट कार्यालय के शाखा प्रभारी  संजय पांडे शामिल रहे।