वासेपुर गैंग्स का अंबिकापुर कनेक्शन आजकल सुर्खियों में है।

वहां से आपसी वर्चस्व की लड़ाई में दो महिलाओं की नृशंस हत्या के आरोपी 2013 से अंबिकापुर में छिपे रहे और इसमें उन्हें कुछ स्थानीय लोगों ने सब कुछ जानते हुए भी सहयोग देकर इनकी सांठ गांठ से जमकर रुपए कमाए और हर धंधे में दखलंदाजी शुरू कर दी।

अब इसमें एक संदिग्ध साकिब अफज़ल उर्फ़ नेता का नाम सुर्खियों में है जिसके बारे में बताया जा रहा है कि ये भी उस हत्याकांड में सहयोगी था लेकिन अभी तक इसकी पुष्टि सरगुजा पुलिस नहीं कर पाई है।

ये नेता उर्फ़ साकिब अफज़ल भी हत्यारे साबिर आलम के साथ देखा जाता था साथ ही बैदुल के साथ ये साये की तरह रहता था। इसी नेता के साथ अंबिकापुर कचहरी में मुख़्तार का काम करने वाले फारूक अमूनन को हर दूसरे दिन खरसिया चौक या कहीं भी देखा जाता था इनका मुख्य काम ज़मीन पर नज़र रखना था जिसमें फारुक इनकी हर मदद कर पूरे तरीके बताता था।

अब एक नज़र पृष्ठभूमि पर।

सबीर आलम बनाम झारखंड राज्य : मामले का विस्तृत हिंदी सार

यह मामला वर्ष 2001 में झारखंड के धनबाद स्थित वासेपुर में हुए बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड से जुड़ा है।

अभियोजन के अनुसार, 18 अक्टूबर 2001 को शेर खान, उनके बहनोई इमदाद उर्फ गुड्डू, उनकी मां नाज़मा खातून तथा मौसी शहनाज़ खातून सब्जी खरीदने पुराना बाजार गए थे। खरीदारी के बाद लौटते समय शेर खान और इमदाद पान पराग खरीदने के लिए एक गुमटी पर रुक गए, जबकि नाज़मा खातून और शहनाज़ खातून आगे बढ़ गईं।

इसी दौरान अभियोजन के अनुसार सबीर आलम, बाबू आलम सहित कई हथियारबंद आरोपी वहां पहुंचे और दोनों महिलाओं को घेर लिया। आरोप है कि सबीर आलम ने नाज़मा खातून पर गोली चलाई, जबकि बाबू आलम ने शहनाज़ खातून पर गोली मारी। गोली लगने से दोनों महिलाओं की मौके पर ही मृत्यु हो गई। घटना के बाद आरोपी अलग-अलग वाहनों से फरार हो गए।

सूचना मिलने पर बैंक मोड़ थाना पुलिस मौके पर पहुंची। फर्दबयान दर्ज कर हत्या सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने घटनास्थल से हथियार, कारतूस, खून से सनी मिट्टी और अन्य साक्ष्य जब्त किए तथा दोनों शवों का पोस्टमार्टम कराया।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डॉक्टरों ने पुष्टि की कि दोनों महिलाओं की मृत्यु गोली लगने से हुई थी। नाज़मा खातून के सिर में तथा शहनाज़ खातून के गर्दन में गोली लगी थी। चिकित्सकीय साक्ष्यों ने हत्या की पुष्टि की।

जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोपपत्र दाखिल किया। मुकदमे के दौरान अभियोजन ने प्रत्यक्षदर्शी गवाहों सहित कई गवाह प्रस्तुत किए। बचाव पक्ष ने दावा किया कि घटना के समय सबीर आलम धनबाद में नहीं बल्कि रांची में था और अस्पताल में भर्ती था। इस दावे के समर्थन में कुछ गवाह और दस्तावेज प्रस्तुत किए गए।

सत्र न्यायालय ने प्रत्यक्षदर्शी गवाहों, चिकित्सकीय साक्ष्यों और अन्य सबूतों पर भरोसा करते हुए सबीर आलम को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/149, 148 तथा आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत दोषी ठहराया और आजीवन कारावास सहित अन्य सजाएं सुनाईं।

इसके विरुद्ध सबीर आलम ने झारखंड हाईकोर्ट में अपील दायर की। अपील में कहा गया कि प्रत्यक्षदर्शी गवाह रिश्तेदार हैं, उनके बयान विरोधाभासी हैं तथा वह घटना के समय रांची में था।

21 अक्टूबर 2014 को झारखंड हाईकोर्ट ने सभी साक्ष्यों की समीक्षा करने के बाद माना कि अभियोजन पक्ष के प्रत्यक्षदर्शी गवाहों की गवाही विश्वसनीय है और उनका समर्थन चिकित्सकीय साक्ष्यों से भी होता है। अदालत ने बचाव पक्ष द्वारा प्रस्तुत अलिबी (घटनास्थल पर मौजूद न होने) के दावे को अविश्वसनीय माना और कहा कि इसे पर्याप्त प्रमाणों से सिद्ध नहीं किया गया।

अंततः झारखंड हाईकोर्ट ने सबीर आलम की अपील खारिज कर दी तथा निचली अदालत द्वारा सुनाई गई दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा।
अब अंबिकापुर में इनकी एंट्री कराने वाले इरशाद आलम की बात —
शब्बीर और उर्फ़ बाबू जावेद आलम
शब्बीर आलम ने नजमा ख़ातून का मर्डर किया
बाबू आलम ने शहजाद को मारा
हाई कोर्ट ने सजा उम्रक़ैद को बरकरार रखा
बैदूल की दो बहनें हैं जिसमें एक का बेटा इरशाद आलम है जो यहाँ इन अपराधियों को लेकर आया सबसे पहले इरशाद अपने मौसा बाबू आलम को लेके आया।
अंबिकापुर में आने के बाद इरशाद के नाम पर और बैदूल के छोटे भाई बसीउर रहमान उर्फ़ छोटू के नाम पर बस लिए।
आज इरशाद आलम और इसके भाई नौशाद आलम इनके नाम पर 20 बस है जिसकी क़ीमत 16 करोड़ है।
आश्चर्य ये है कि इरशाद आज भी किराए के मकान में रह रहा है मुख्य आरोपी शब्बीर आलम के घर के बगल में।
भू माफियाओं का काम भी कर रहे हैं।
कचहरी में मुख़्तार फ़ारूक़ की भूमिका इसमें इनको फ़र्ज़ी दस्तावेज के आधार पर लंबा लोन जिसकी राशि 5 करोड़ बताई जा रही है।
बैदूल के घर की भी जांच हो जहाँ घर बना है उसकी भी जांच हो।
बैदूल ,इरशाद आलम और नौशाद आलम का दो दो जगह आधार कार्ड है। ऐसा बताया जा रहा है जो जांच का विषय है।
इरशाद एक परमिट पर यानि एक ही नंबर की तीन बस एक साथ संचालित किए हैं।
बासेपुर मे 2001 में मर्डर हुआ था।
अंबिकापुर में बाबू आलम और शब्बीर आलम की कई कीमती ज़मीन शब्बीर आलम के बेटे कामरान साबरी के नाम से है।
शब्बीर आलम का एक बेटा गांजे का कारोबार भी करता है ये जानकारी बताई जा रही है। अब देखना है कि छत्तीसगढ़ की सरगुजा पुलिस इस मामले में क्या करती है और इसकी विवेचना किस तरह करती है।

सूत्रों की मानें तो ज़मीन के अवैध कारोबार में अप्रत्यक्ष रूप से कुछ राजनेताओं को भी इनका सहयोग मिला है जिसमें भाजपा के कुछ नाम भी बताए जा रहे हैं।

आलोक शुक्ल,सम्पादक पहल।

You missed

अंबिकापुर में महावीर अस्पताल की एक मशीन सील।कलेक्टर अजीत बसंत के निर्देश पर तीन अस्पतालों का औचक निरीक्षण।लाइफ़लाइन अस्पताल में सभी नियमों का पालन होना पाया गया।

महावीर अस्पताल में लार्ज लैब का लाइसेंस नहीं मिलने पर मशीन सील, पंजीयन के लिए आवेदन करने के निर्देश

अम्बिकापुर, 03 अक्टूबर 2026/ कलेक्टर  अजीत वसंत के निर्देश पर जिले के निजी असअंबिकापुर में महावीर अस्पताल की एक मशीन सील।कलेक्टर अजीत बसंत के निर्देश पर तीन अस्पतालों का औचक निरीक्षण।लाइफ़लाइन अस्पताल में सभी नियमों का पालन होना पाया गया।अंबिकापुर में महावीर अस्पताल की एक मशीन सील।कलेक्टर अजीत बसंत के निर्देश पर तीन अस्पतालों का औचक निरीक्षण।लाइफ़लाइन अस्पताल में सभी नियमों का पालन होना पाया गया।्पतालों में संचालित गतिविधियों लार्ज लैब के पंजीयन, लाइसेंस एवं निर्धारित व्यवस्थाओं की जांच के लिए चार सदस्यीय दल का गठन किया गया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जे.एस. सरूता के मार्गदर्शन में गठित दल द्वारा गायत्री अस्पताल, महावीर अस्पताल एवं लाइफलाइन अस्पताल का निरीक्षण किया गया।

निरीक्षण के दौरान दल ने अस्पतालों में संचालित लार्ज लैब के लाइसेंस एवं पंजीयन संबंधी दस्तावेजों के साथ उपलब्ध व्यवस्थाओं की जांच की। महावीर अस्पताल के निरीक्षण में लार्ज लैब का लाइसेंस नहीं पाया गया। अस्पताल के पास केवल स्माल लैब संचालन का लाइसेंस उपलब्ध था। इस पर लार्ज लैब में उपयोग की जा रही मशीन को तत्काल प्रभाव से सील किया गया। अस्पताल प्रबंधन को लार्ज लैब के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर अनुज्ञापत्र प्राप्त करने के निर्देश दिए गए। निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही लार्ज लैब का संचालन किया जा सकेगा।

गायत्री अस्पताल में लार्ज लैब के निरीक्षण के दौरान दस्तावेजों एवं उपलब्ध व्यवस्थाओं की जांच की गई। वहीं लाइफलाइन अस्पताल के पास लार्ज लैब का लाइसेंस उपलब्ध पाया गया ।

कलेक्टर अजीत वसंत ने जिले के निजी अस्पतालों में संचालित लार्ज लैब का निर्धारित प्रावधानों के अनुसार पंजीयन एवं लाइसेंस सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि लार्ज लैब के संचालन के लिए आवश्यक पंजीयन एवं अनुज्ञापत्र की प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित कराया जाए तथा बिना निर्धारित अनुमति के लैब संचालन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

निरीक्षण दल में नर्सिंग होम एक्ट के नोडल अधिकारी डॉ. पी.के. सिन्हा,  डॉ. दीपक गुप्ता पैथोलॉजिस्ट, शिवेंद्र सिंह सदस्य तथा नर्सिंग होम एक्ट कार्यालय के शाखा प्रभारी  संजय पांडे शामिल रहे।