युवा IPS राहुल बंसल मामले में जब सीबीआई कोर्ट ने IPS के मांगने पर कॉल रिकॉर्डिंग, व्हाट्सएप चैट देने से मना करने का आदेश यह कहते हुए निकाला कि ये हम नहीं दे सकते इससे जांच प्रभावित हो सकती है तो सवाल ये कि ये और लोगों को किसने उपलब्ध कराया।

IPS राहुल बंसल,एक करोड़ रुपए लेने का आरोप, सीबीआई कोर्ट का वो आदेश और आदेश के बाद एक और कांड मामला वो नहीं जो दिख रहा है बल्कि उससे भी गंभीर और बड़े नेटवर्क का है।

रिपोर्ट -छत्तीसगढ़ से आलोक शुक्ल के साथ मुंबई से अरविंद दुबे की विशेष रिपोर्ट।

IPS राहुल बंसल मामले में सीबीआई कोर्ट का आदेश पहल के माध्यम से आपके सामने ला रहे हैं जिसमें सीबीआई कोर्ट ने शिकायत कर्ता के द्वारा दी गई पेन ड्राइव जिसमें कथित तौर पर केस से संबंधित कॉल रिकॉर्डिंग व व्हाट्सएप चैट है ये कहते हुए मना कर दिया कि ये हम इसलिए आपको नहीं दे सकते क्योंकि इससे जांच प्रभावित हो सकती है। हमारे मुम्बई के विशेष संवाददाता अरविंद दुबे ने मामले की पूरी पड़ताल करते हुए सीबीआई के दो पेज के आदेश के साथ कुछ और तथ्य भी भेजे जो बेहद गंभीर हैं।

ये सीबीआई कोर्ट का आदेश है। साफ़ है कि इस आदेश को IPS राहुल बंसल को दिया गया लेकिन शिकायत कर्ताओं ने इसके विपरीत जाकर सोशल मीडिया पर ये सब फैलाने में इतनी जल्दबाजी क्यों की ये विवेचना का विषय है।

सीबीआई कोर्ट ने ये आदेश अभी 27 जुलाई को दिया और इसके कुछ दिन बाद 6 अगस्त से कॉल रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर कुछ समाचार के माध्यम से कुछ लोगों ने वायरल करनी शुरू कर दी। आखिर जब मामला सीबीआई कोर्ट में चल रहा है तो इसका मीडिया ट्रायल करवाकर इसे अलग दिशा देने का प्रयास क्यों किया गया और इसके पीछे किसका नेटवर्क है ये भी पुलिस को पूरी गहराई से जांच करना चाहिए खासकर सरगुजा एस पी राजेश अग्रवाल को तो इस मामले पर तत्काल संज्ञान लेना चाहिए था क्योंकि मामला इनके ज़िले से जुड़ा है वो भी एक पुलिस अधिकारी से।

जब पुलिस अधिकारी वो भी एक IPS के मामले में एस पी का रुख़ इस क़दर ढीला और सुस्त है तो आमजन का क्या हाल होगा ये बताने की आवश्यकता नहीं है।

इस मामले को सोशल मीडिया पर एकतरफा दिखाने और माननीय न्यायालय के आदेश के बाद भी दूसरे पक्ष के द्वारा ऑडियो वायरल करने के बाद इस मामले में हमने और हमारे विशेष संवाददाता अरविंद दुबे ने मामले की कड़ियों का जोड़कर कुछ पड़ताल की जिसमें एक बात सामने आई कि ये मामला जो दिखाया जा रहा है वैसा नहीं है।

1880 करोड़ रुपए के फ्राड के इस मामले के तार देश के यूपी, हरियाणा, गुजरात, राजस्थान,मध्यप्रदेश, दिल्ली, बिहार से जुड़े हैं और अब तक IPS राहुल बंसल के नेतृत्व में 23 लोगों को पुलिस ने पकड़ा है जिससे पूरे देश में हलचल मची है।

पहल इस मामले में IPS राहुल बंसल पर लगे गंभीर आरोपों पर मात्र ये समाचार हर उस एंगल से सामने ला रहा है जिसमें षड्यंत्र की भी संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

यदि इस मामले में सीबीआई कोर्ट IPS की गलती पकड़ती है तो भी ये गंभीर मामला है वहीं यदि उन्हें फंसाने की कोशिश की जा रही है तो ये उससे भी गंभीर है।

राहुल बंसल ने हमसे बात करते हुए कहा है कि “मामला माननीय न्यायालय में है और मैं अपना पक्ष रखा हूं, आज तक आरोपी जिसका साला शिकायकर्ता है उससे न तो मैं कभी मिला हूं, न ही देखा हूं न ही मेरी फोन पर उससे कोई बात हुई है। मुझे न्यायालय की प्रक्रिया का नियमानुसार हर पालन जिम्मेदारी से करना है क्योंकि मैं एक जिम्मेदारी के पद पर बैठा हूं।माननीय न्यायालय का आदेश कॉल रिकॉर्डिंग व्हाट्सएप चैट वाली पेन ड्राइव को नहीं देने का था इसके विपरीत भी ये वायरल किया गया ये पक्ष भी मै रख रहा हूं जबकि उसमें मेरी बातचीत की कोई क्लिप नहीं है, आदेश के ठीक कुछ दिन बाद ऑडियो वायरल किया गया जिसमें कथित तौर पर पुलिस कांस्टेबल की आवाज़ है। जब मामला माननीय न्यायालय में है तो ये वायरल करना अपने आप में सवाल और शंका का जन्म दे रहा है।”

अब देखना ये है कि 18 अगस्त को अगली सुनवाई की तारीख़ सीबीआई कोर्ट ने दी है लेकिन सबसे महत्वपूर्ण ये है कि ऑडियो वायरल करने वाला कौन है इसकी जांच निष्पक्ष रूप से होनी चाहिए। न्यायालय ने जब एक पक्ष को कॉल रिकॉर्डिंग, व्हाट्सएप चैट देने से मना किया तो शिकायत कर्ता को किस बात की जल्दबाजी थी ये अपने आप में एक ऐसा सवाल है जिस पर जांच एजेंसी को संज्ञान लेकर नीर क्षीर जांच कर दोषियों पर कार्यवाही करनी चाहिए क्योंकि मामला कई सौ नहीं हजार करोड़ के फ्राड का है।

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