
आज महान गायक मुकेश जी की 50 वीं पुण्यतिथि है। अपने फ़िल्मी व अन्य सभी गानों को मिलाकर एक हज़ार से भी कम गाने मुकेश जी ने गाए मगर इनमें से अधिकांश हिट हुए।
ग्रेट शो मैन राजकपूर को जब इनके अमेरिका के डेट्राइट में निधन की ख़बर मिली तो इन्होंने कहा था “आज मेरी आवाज़ चली गई है।” और राजकपूर पूरे एक दिन तक एक कमरे में बंद होकर रोते रहे।
मुकेश जी की आवाज़ राजकपूर समेत मनोज कुमार और सुपर स्टार राजेश खन्ना समेत अमिताभ बच्चन तक के लिए इतनी सूट होती थी कि दर्शक फिल्म में इनके गानों को इन अभिनेताओं पर फिल्मांकन से यक़ीन कर बैठते कि गायक और अभिनेता दोनों एक दूसरे के पूरक हैं।
मनोज कुमार मुकेश जी की आवाज़ को अपने लिए एक ऊर्जा मानते थे वहीं राजकपूर तो यहां तक कह देते थे कि हम दो जिस्म एक जान हैं।
संगम फ़िल्म का निर्माण राजकपूर ने किया था और शंकर जयकिशन जैसे दिग्गज संगीतकार ने इस फ़िल्म में कई प्रयोग किए थे। एक साथ कई आवाज़ में कोरस, पहली बार विदेश में खूबसूरत स्पॉट पर शूटिंग समेत गाने में बेहतरीन आर्केस्ट्रा जिसमें पाश्चात्य संगीत का भारतीय राग में इतनी सुंदरता के साथ संयोजन किया गया कि जिसने भी सुना वो मंत्रमुग्ध हो गया।
इस फ़िल्म में यूं तो एक से बढ़कर एक गीत थे लेकिन जब राजकपूर ने मुकेश जी के गाये “दोस्त दोस्त न रहा, प्यार प्यार न रहा, ज़िंदगी हमें तेरा ऐतबार न रहा” ये सुना तो वो इतने भाव विभोर हो गए कि एक ट्रक फूल मुकेश जी के बंगले में भिजवा दिए।
जब ट्रक चालक ने इन्हें कहा कि ये आपके लिए है तब मुकेश जी ने ट्रक वाले को कहा “आप गलत पते पर आ गए हैं ये इतने फूल किसी और के होंगे।” इस पर ट्रक चालक उन्हें फूलों से भरे ट्रक में पीछे ले जाकर सुगंधित गुलाब के फूलों के बीच एक पर्ची दिखाते हैं जिसमें लिखा था “आपका राज”।
अमर गायक मुकेश जी ने रामचरित मानस का गायन भी किया है जो आज भी पूरे देश में आकाशवाणी में बजाया जाता है।
भारत समेत दुनिया के कई देश में मुकेश जी के गीत बहुत प्रसिद्ध हैं “मेरा जूता है जापानी, ये पतलून इंग्लिस्तानी सिर पे लाल टोपी रूसी फिर भी दिल है हिंदुस्तानी ” ये गाना तो जैसे पूरे विश्व में भारत देश के प्यार और समान भाव का परिचायक ही बन गया है जो आज भी उसी तरह सुना जाता है जैसे पहले।
मुकेश जी के लिए आज भी संगीत प्रेमी कहते हैं “ओ जाने वाले हो सके तो लौट के आना।”
आलोक शुक्ल, सम्पादक पहल।
