धमतरी देश का पहला जिला बना, जहां PACS समितियों के माध्यम से किसानों को मिलेगी ड्रोन स्प्रेयर की सुविधा

कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने किया अभिनव पहल का प्रदर्शन

रायपुर , 01 जून 2026। कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने तथा किसानों को वैज्ञानिक एवं उन्नत खेती से जोड़ने की दिशा में जिला धमतरी ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के मार्गदर्शन में जिले की 10 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (PACS) में ड्रोन स्प्रेयर सुविधा प्रारंभ की गई है। इस अभिनव पहल के साथ धमतरी देश का पहला जिला बन गया है, जहां सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को ड्रोन आधारित कृषि सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
आज समिति लोहरसी में आयोजित कार्यक्रम में कलेक्टर  अबिनाश मिश्रा ने इस महत्वाकांक्षी पहल का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में किसानों की उपस्थिति में सभी 10 समितियों के प्रशिक्षित ड्रोन पायलटों द्वारा ड्रोन स्प्रेयर का सफल प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के दौरान ड्रोन तकनीक के माध्यम से उर्वरक एवं कीटनाशकों के सटीक छिड़काव, समय की बचत, लागत में कमी तथा बेहतर कृषि प्रबंधन की उपयोगिता को प्रदर्शित किया गया।
कलेक्टर  अबिनाश मिश्रा ने कहा कि सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों तक आधुनिक तकनीक पहुंचाने का यह एक अभिनव प्रयास है। ड्रोन तकनीक कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने की क्षमता रखती है। इससे किसानों को कम लागत में अधिक दक्षता के साथ कृषि कार्य करने में सहायता मिलेगी। हमारा प्रयास है कि जिले का प्रत्येक किसान आधुनिक एवं वैज्ञानिक खेती की तकनीकों का लाभ उठाकर अपनी उत्पादकता और आय में वृद्धि कर सके। उन्होंने कहा कि धमतरी जिले को कृषि नवाचारों का मॉडल जिला बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है और यह पहल उसी श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस पहल की एक विशेषता यह भी है कि CSC e-Governance के सहयोग से PACS समितियों को कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के रूप में सशक्त किया जा रहा है, जिससे किसानों को एक ही स्थान पर ड्रोन स्प्रेयर जैसी आधुनिक कृषि सेवाओं के साथ-साथ विभिन्न डिजिटल एवं शासकीय सेवाओं का लाभ भी प्राप्त हो सकेगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी सेवाओं की पहुंच बढ़ेगी तथा सहकारी समितियां बहुउद्देशीय सेवा केंद्र के रूप में विकसित होंगी।

जिले में जिन समितियों को ड्रोन स्प्रेयर सुविधा से जोड़ा गया है उनमें बोड़रा, लोहरसी, दोनर, अछोटा, खरेंगा, भोथीडीह, कुंदेल, गड़ाडीह, जुगदेही तथा करेली शामिल हैं। इन समितियों के माध्यम से क्षेत्र के किसानों को आवश्यकता अनुसार ड्रोन सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार ड्रोन तकनीक के उपयोग से कम समय में अधिक क्षेत्र में छिड़काव संभव होगा, रसायनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित होगा तथा किसानों का श्रम और लागत दोनों कम होंगे। साथ ही खेतों में सीधे प्रवेश की आवश्यकता कम होने से फसलों को नुकसान की संभावना भी घटेगी। यह पहल कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के साथ-साथ युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास के नए अवसर भी सृजित करेगी।

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