गैंग्स ऑफ वासेपुर अंबिकापुर कनेक्शन मामले में अब आईजी दीपक कुमार झा ने एक बड़े प्लान के तहत संदिग्धों समेत मुख्य फरार होकर यहां रहने वाले शबीर आलम पर कल शाम एक FIR पुराने मामले में दर्ज़ की है।

बताया जा रहा है कि इरशाद आलम शब्बीर आलम के साथ इसमें आरोपी है और ये पुराना झगड़ा का मामला है।

अब सरगुजा आईजी ने पूरा होमवर्क करने के बाद इसमें एकाएक तेजी से काम करना शुरू कर दिया है सूत्रों की मानें तो इस मामले में आईजी दीपक कुमार झा ने मात्र युवा आईपीएस वैभव बैंकर और राहुल बंसल से ही महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है और सरगुजा में विवादित पुलिस अधिकारी और कुछ पुलिस वालों को इससे पूरी तरह से दूर रखा गया है।

सरगुजा आईजी दीपक कुमार झा ने पहल से बात करते हुए कहा है कि “चूंकि ये मामला माननीय न्यायालय के आदेश के बाद भी पालन का नहीं है ऐसे में हम इन अपराधियों को जो दूसरे राज्य से माननीय उच्च न्यायालय के द्वारा सजा सुनाने के बाद भी फरार होकर यहां रहे ये बेहद गंभीर है। इसमें इन अपराधियों को संरक्षण देने वाले भी बराबर के दोषी हैं। हमारे पास इनकी कई जानकारी आ चुकी है और हम चरण बद्ध तरीके से आगे बढ़ रहे हैं साथ ही कुछ मीडिया रिपोर्ट का संज्ञान भी ले रहे हैं। हमारी नज़र लगातार सोशल मीडिया पर बनी हुई है। जांच आगे बढ़ रही है और विश्वास रखिए कि कानून से खिलवाड़ करने वाले जल्द ही पकड़े जाएंगे।”

अब एक नज़र राजहंस बस के संचालक बैदुल खान पर दर्ज़ FIR पर

इसमें बैदुल खान का नाम स्पष्ट है।

वहीं बार बार सोशल मीडिया पर अपना वीडियो संदेश प्रायोजित तरीके से चलवाना इरशाद आलम को भारी पड़ गया है इसके विरुद्ध भी कल FIR की गई है और बकायदा ये हत्यारे साबिर आलम के साथ एक मारपीट में सहयोगी था इससे यही खुलासा होता है ऐसे में अब ये दो दो राज्यों की पुलिस के निशाने पर एक साथ आ गया है।

इसमें पुराने मामले में कल FIR दर्ज़ हुई है जिसमें शब्बीर आलम के साथ इरशाद आलम और कई अन्य नाम शामिल हैं।

बताया जा रहा है कि आसपास के लोग भी अब इनके कारनामे पुलिस तक पहुंचा रहे हैं जिससे कई कड़ियाँ जुड़ रही हैं।

पहल लगातार इस मामले पर खुलासा कर जिम्मेदारी के साथ लिख रहा है कि ये मामला हाई प्रोफाइल है और कई खुलासे जिसमें मनी लॉन्ड्रिंग भी है वो भी एक महत्वपूर्ण पहलू है।

आलोक शुक्ल, सम्पादक पहल।

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निरीक्षण के दौरान दल ने अस्पतालों में संचालित लार्ज लैब के लाइसेंस एवं पंजीयन संबंधी दस्तावेजों के साथ उपलब्ध व्यवस्थाओं की जांच की। महावीर अस्पताल के निरीक्षण में लार्ज लैब का लाइसेंस नहीं पाया गया। अस्पताल के पास केवल स्माल लैब संचालन का लाइसेंस उपलब्ध था। इस पर लार्ज लैब में उपयोग की जा रही मशीन को तत्काल प्रभाव से सील किया गया। अस्पताल प्रबंधन को लार्ज लैब के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर अनुज्ञापत्र प्राप्त करने के निर्देश दिए गए। निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही लार्ज लैब का संचालन किया जा सकेगा।

गायत्री अस्पताल में लार्ज लैब के निरीक्षण के दौरान दस्तावेजों एवं उपलब्ध व्यवस्थाओं की जांच की गई। वहीं लाइफलाइन अस्पताल के पास लार्ज लैब का लाइसेंस उपलब्ध पाया गया ।

कलेक्टर अजीत वसंत ने जिले के निजी अस्पतालों में संचालित लार्ज लैब का निर्धारित प्रावधानों के अनुसार पंजीयन एवं लाइसेंस सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि लार्ज लैब के संचालन के लिए आवश्यक पंजीयन एवं अनुज्ञापत्र की प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित कराया जाए तथा बिना निर्धारित अनुमति के लैब संचालन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

निरीक्षण दल में नर्सिंग होम एक्ट के नोडल अधिकारी डॉ. पी.के. सिन्हा,  डॉ. दीपक गुप्ता पैथोलॉजिस्ट, शिवेंद्र सिंह सदस्य तथा नर्सिंग होम एक्ट कार्यालय के शाखा प्रभारी  संजय पांडे शामिल रहे।