गैंग्स ऑफ वासेपुर अंबिकापुर कनेक्शन पर आईजी ने जुटाई कई जानकारी।बिना दवाब में आने वाले दमदार आईपीएस के नेतृत्व में स्पेशल टीम से जांच के संकेत।

सरगुजा आईजी दीपक कुमार झा गैंग्स ऑफ वासेपुर अंबिकापुर कनेक्शन का मामला इन दोनों तेज़ तर्रार आईपीएस में से किसी एक के नेतृत्व में स्पेशल टीम गठित करके देने के मूड में हैं।


छत्तीसगढ़ का सरगुजा संभाग का सबसे बड़ा शहर अंबिकापुर पिछले महीने से पूरे देश में सुर्खियों में है।
ये सुर्ख़ियाँ अंबिकापुर को स्वच्छता में मिले अवार्ड या यहाँ की किसी प्रतिभा को मिले सम्मान की वजह से नहीं बल्कि उस चौंका देने वाले घटनाक्रम से है जिससे यहाँ के अमन पसंद लोगों के होश उड़े हुए हैं।होश उडें भी नहीं तो क्यों जब जघन्य हत्याकांड के गुनहगार जो उच्च न्यायालय से बकायदा उम्रक़ैद की सज़ा पाते हैं और फरार होके 13 सालों तक अंबिकापुर में अपने रिश्तेदार की मदद से छिपे रहते हैं यही नहीं बकायदा मकान तक बनवा लेते हैं और किसी को भनक तक नहीं लगती कि नियम कानून को ठेंगा दिखाते हुए दुर्दांत अपराधी ऐशो आराम से अमन चैन की ज़िंदगी बसर कर रहा है।
झारखंड पुलिस आती है वो भी बिना किसी को जानकारी दिए सर्च के बहाने लेकिन ये अपराधी और इसका सहयोगी भीड़ इकट्ठा कर फरार हो जाते हैं।
जब इसका खुलासा होता है तब यहाँ के लोगों के साथ साथ पुलिस के होश भी उड़ जाते हैं कि कितना बड़ा अपराधी यहाँ छिपा हुआ था जिस पर बकायदा “गैंग्स ऑफ वासेपुर “ जैसी चर्चित फ़िल्म तक बन चुकी है।
खैर अब चर्चा इन्हें पनाह देने वालों और इन्हें भगाने में मदद करने वालों की।
इन्हें जब झारखंड की पुलिस पकड़ने आती है तो आसपास से भीड़ इकट्ठा कर फ़िल्मी स्टाइल में इन्हें स्थानीय कुछ लोगों की मदद से भगा दिया जाता है इतना ही नहीं क़रीब दर्जन भर घरों में लगे सीसीटीवी कैमरे के डाटा भी उड़ा दिए जाते हैं जिससे साक्ष्य ही न मिले।ये अपने आप में जांच का बड़ा विषय है कि किसके दवाब में ये सीसीटीवी फ़ुटेज नष्ट किए गए यदि पुलिस सख्ती से पूछताछ करे तो कई क्लू आसानी से मिलते जायेंगे और जांच सही दिशा में आगे बढ़ेगी।
अब बात शब्बीर आलम को पनाह देने के आरोप में घिरे राजहंस बस के संचालक बैदुल खान की साथ ही इरशाद आलम की।
बैदुल खान के फोन और लोकेशन समेत इरशाद आलम की पूरी लोकेशन व जानकारी भी इसमें अहम कड़ी साबित होगी।
किस तरह से ये बड़ी कीमती बसों का संचालन करते रहे साथ ही कुछ को गुमराह कर अपना साम्राज्य स्थापित करते रहे।
इसमें बैदुल खान ने किन बसों के लिए लोन लिया और किन बसों को किस आधार पर ख़रीदा ये अहम जानकारी भी सरगुजा के आईजी दीपक कुमार झा ने जुटानी शुरू कर दी हैं ऐसी जानकारी हमें मिल रही है।दीपक कुमार झा आईआईटी कानपुर से पढ़े एक होनहार इंजीनियरिंग के छात्र रह चुके हैं और दिमागी रूप से इनके पास उच्च तकनीकी से डाटा तैयार करने की महारत है जिसके कारण पुलिस विभाग में इनकी एक अलग पहचान है।
दिमाग़ से शांत मगर पल भर में डाटा इकट्ठा करने की विशेषता इस केस में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में इनके लिए काफी है।
बताया जा रहा है कि राज्य के डीजीपी अरूण देव गौतम ने भी इस केस में इन्हें पूरी तरह से बड़ी जानकारी जुटाने के लिए पहले ही कह दिया है।
इस कड़ी में सरगुजा पुलिस के कुछ अधिकारी के ढीले रवैये से आईजी दीपक कुमार झा परिचित हैं जिस कारण इस केस में ये बलरामपुर ज़िले में पदस्थ तेज़ तर्रार युवा एसपी वैभव बैंकर को इसकी ज़िम्मेदारी देने की घोषणा कर सकते हैं।
वैभव बैंकर बिना किसी दवाब में काम करने वाले युवा और सख़्त आईपीएस हैं बताया जाता है कि गुजरात के होने के कारण इनके ऊपर यहाँ का कोई भी राजनेता किसी तरह के दवाब को डालने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाएगा।
वहीं दूसरा नाम अंबिकापुर में पदस्थ युवा आईपीएस राहुल बंसल का है जो यहाँ सीएससी हैं और मूलतः राजस्थान के रहने वाले हैं।
अभी हाल ही में राहुल बंसल पर कुछ स्थानीय लोगों ने कुछ दवाब बनाने की कोशिश भी की साथ ही ऊपर तक शिकायत भी लेकिन बड़े अधिकारियों तक कई अहम जानकारियाँ आईबी के माध्यम से पहुंची और उनकी विचारधारा भी युवा आईपीएस के लिए बदलीं।
सूत्रों की मानें तो एक बड़ा तथ्य सामने आया है कि भाजपा शासित राज्य छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में कुछ भाजपा के लोग लगातार राहुल बंसल की शिकायत किए जा रहे थे लेकिन विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो राजस्थान के ओम माथुर जो कि छत्तीसगढ़ में भाजपा को लाने के शिल्पकार हैं उन तक ये बात पहुंच गई इसके बाद इन्हें बिना दवाब में काम करने की खुली छूट मिल गई है।
यदि दो युवा आईपीएस तेज दिमाग़ वाले आईजी के साथ इसमें आते हैं तो यहाँ इन अपराधियों को संरक्षण देने वाले कई सफेदपोश लोगों के नाम भी सामने आयेंगे ये तय है।
अब देखना ये है कि आईजी दीपक कुमार झा इस हाईप्रोफ़ाइल केस में स्पेशल टीम किस अधिकारी के नेतृत्व में कब गठित करेंगे?


आलोक शुक्ल,संपादक पहल॥

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