
पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल के गृह क्षेत्र लखनपुर में बड़ा पेंशन घोटाला: 39 से 49 वर्ष के युवाओं को कागजों में 60 पार दिखा बांटा जा रहा वृद्धा पेंशन।
वोटर लिस्ट और बैंक स्टेटमेंट से खुला फर्जीवाड़े का राज; 5 बड़े उदाहरणों से नगर पंचायत प्रशासन की धांधली उजागर
कैबिनेट एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल के गृह क्षेत्र नगर पंचायत लखनपुर में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत भारी भ्रष्टाचार और बड़े पैमाने पर धांधली का मामला गरमा गया है। स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की कथित मिलीभगत से नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए 39 से 49 वर्ष के युवाओं की उम्र कागजों में बढ़ाकर उन्हें 60 वर्ष से अधिक का बुजुर्ग दर्शाया गया है और वृद्धावस्था पेंशन का लाभ दिया जा रहा है।


दस्तावेजों में फेरबदल और काट-छांट कर युवाओं को बनाया ‘बुजुर्ग’
प्राप्त जानकारी के अनुसार, लखनपुर नगर पंचायत में निजी स्वार्थों की पूर्ति और चुनावी लाभ के लिए नियमों को ताक पर रख दिया गया। पहचान पत्रों, वोटर लिस्ट और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों में फर्जी तरीके से उम्र में काट-छांट की गई। इस कूटरचित खेल के जरिए दर्जनों अपात्र युवाओं को वृद्धा पेंशन, सूची में शामिल कर दिया गया।
इन 5 मामलों ने खोली फर्जीवाड़े की पोल
विकास गर्ग द्वारा की गई पड़ताल में संदिग्धों के बैंक अकाउंट स्टेटमेंट, वोटर लिस्ट और नगर पंचायत लखनपुर की ‘इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था निराश्रित पेंशन (60 से 79 वर्ष)’ की आधिकारिक सूची का मिलान किया गया। इसमें स्पष्ट तौर पर धोखाधड़ी के सबूत मिले हैं, जो नगर पंचायत सीएमओ और जिम्मेदारों पर लग रहे आरोपों की सीधे पुष्टि करते हैं:
- लवकुश साहू: वास्तविक उम्र लगभग 43 वर्ष, लेकिन नगर पंचायत के रिकॉर्ड में 61 वर्ष दर्शाया गया।
- नरेंद्र रजक: वास्तविक उम्र लगभग 39 वर्ष, रिकॉर्ड में 61 वर्ष बनाकर दी जा रही पेंशन।
- राकेश दास: वास्तविक उम्र लगभग 49 वर्ष, जिसे कागजों में 62 वर्ष दिखाया गया।
- बृजेश दास: वास्तविक उम्र लगभग 45 वर्ष, रिकॉर्ड में दर्ज उम्र 63 वर्ष।
- जंगु दास महंत: वास्तविक उम्र केवल 39 वर्ष, लेकिन नगर पंचायत की सूची में उम्र 63 वर्ष दिखाई गई।
हर महीने लाखों का शासकीय गबन, जिम्मेदारों की भूमिका संदिग्ध
अपात्र व्यक्तियों के बैंक खातों में प्रतिमाह शासकीय पेंशन की राशि धड़ल्ले से ट्रांसफर की जा रही है। आशंका जताई जा रही है कि यदि लखनपुर नगर पंचायत क्षेत्र के सभी 200 से अधिक पेंशन खातों की निष्पक्ष और गहन जांच कराई जाए, तो हर महीने 1 लाख रुपये से अधिक के सरकारी गबन और लाखों के घोटाले का पर्दाफाश होगा।
कड़े एक्शन की मांग: एफआईआर और बर्खास्तगी की उठी आवाज
स्थानीय जनता में इस घोटाले को लेकर गहरा आक्रोश व्याप्त है।
एक स्थानीय युवक ने तो इस पूरे मामले की शिकायत पिछले साल ही सरगुजा के तत्कालीन कलेक्टर विलास भोस्कर से की थी लेकिन इस मामले को भी तत्कालीन कलेक्टर विलास भोस्कर ने ठंडे बस्ते में डाल दिया जबकि ये गंभीर मामला है इसे लेकर वहां के आमजन प्रशासन पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं।


- जिला स्तरीय उच्चस्तरीय जांच समिति गठित कर सभी पेंशन खातों की पड़ताल की जाए।
- फर्जी दस्तावेज तैयार करने और गबन में शामिल मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ), संबंधित पार्षदों और कर्मचारियों को तत्काल बर्खास्त किया जाए।
- शासकीय धन की चोरी और कूटरचना के आरोप में दोषियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर जेल भेजा जाए।
अब देखना होगा कि इस पुख्ता सबूतों वाले मामले पर जिला प्रशासन और शासन क्या सख्त कार्रवाई करता है, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। - हालांकि वर्तमान कलेक्टर अजीत बसंत बिना दबाव में आए काम करने के लिए जाने जाते हैं ऐसे में हम समाचार और प्रमाण के माध्यम से ये तथ्य उनके संज्ञान में ला रहे हैं।
- सबसे बड़ा सवाल ये कि मंत्री राजेश अग्रवाल को इस मामले की एक साल पहले ही हो चुकी शिकायत की ख़बर क्यों नहीं है ये भी बात हैरान करने वाली है।
आलोक शुक्ल, सम्पादक पहल।
